बलिया का नरही थाना क्षेत्र पशु और शराब तस्करी का बना हब, पुलिस की रोज कमाई लाखों में

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बलिया का नरही थाना क्षेत्र पशु और शराब तस्करी का बना हब, पुलिस की रोज कमाई लाखों में

नरही से कोटवां नारायणपुर तक गंगा के रास्ते इंजन चालित नावों से भेजा जाता है बिहार

तीन सरकारी शराब दुकान तो गंगा के किनारे ही

एक माह पहले कोरंटाडीह चौकी इंचार्ज और सिपाही नपे थे, फिर भी खेल जारी

सिपाही के आरोपों पर चुप्पी साध गए आला अफसर

एक वर्ष पहले भी एडीजी व डीआईजी ने छापेमारी कर अवैध वसूली का खोला था राज

बलिया। जिले में बिहार प्रांतों से सटे इलाकों में धड़ल्ले से पशु और शराब की तस्करी दस्तूर जारी है। पुलिस की ओर से रोकने को लेकर की गई कवायद पूरी तरह फेल है। यह बात अलग है कि कभी कभार बिहार पुलिस अपने इलाके में पहुंच रही शराब की खेप को पकड़ कर कार्रवाई करती है। इसके बावजूद बलिया पुलिस चुप्पी साधे रहती है। खासकर नरही थाना क्षेत्र तो पशु और शराब तस्करी के लिए पूरी तरह मुफीद बना हुआ है। यहां इस तस्करी को पुलिस का संरक्षण प्राप्त है। करीब एक माह पहले कोरंटाडीह चौकी के पुलिसकर्मियों का वीडियो वायरल होने पर चौकी इंचार्ज समेत कई पुलिसकर्मी नपे। लेकिन एक पुलिस के आरोपों की ना तो कोई जांच हुई और ना ही कोई कार्रवाई ही हुई। यही नहीं करीब एक साल पहले एडीजी जोन वाराणसी और डीआईजी आजमगढ़ की ओर से छापेमारी कर रोजाना लाखों की अवैध वसूली का खुलासा भी किया गया। लेकिन इसके बावजूद नरही थाना क्षेत्र की कार्यशैली में कोई बदलाव नहीं हो रहा है। आज भी बड़े पैमाने पर पशु और शराब तस्करी हो रही है जिससे पुलिस की लाखों की कमाई रोज हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो चर्चा यह भी है कि नरहीं थाने पर एक पुलिस अधिकारी का छत्रछाया है।
नरही थाना क्षेत्र के नरही से लेकर कोटवां नारायणपुर के बीच गंगा किनारे शाम ढलते ही गंगा नदी में इंजन चलित नावों की धड़-धड़ाहट शुरू हो जाती है। बताया जाता है कि इन नावों से शराब की खेप बिहार को पहुंचाया जाता है। खासकर तीन सरकारी शराब की दुकानें कोट अंजोरपुर, सोहांव और कोरंटाडीह
चौकी के सामने वाले रास्ते पर गंगा किनारे ही स्थित है। इन दुकानों पर खरीदार कम तस्कर ही ज्यादा पहुंचते हैं क्योंकि यहां से शराब को बिहार ले जाना काफी आसान है। इसके अलावा सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित शराब की दुकानों से भी बड़े पैमाने पर तस्करी होती है। इन तस्करों से नरही पुलिस और कोरंटाडीह चौकी के पुलिसकर्मी अपने-अपने क्षेत्र में वसूली करते हैं। इसके लिए खास पुलिसकर्मियों को जिम्मेदारी दी गई है जो बिना वर्दी पहने चौकी के आसपास के क्षेत्र में बाइक से घूमते रहते हैं। भरौली चौराहे पर तो उनकी परमानेंट ड्यूटी रहती है। यहां तस्करों का जमावड़ा होता है और चढ़ावा मिलता है। यही नहीं नरही थाना से लेकर कोरंटाडीह चौकी तक शराब व पशु तस्करों का पूरे दिन आना जाना होता है। इसी इसी तरह रोजाना छोटे बड़े और लक्जरी वाहनों से गंगा पुल के रास्ते पशु तस्करी होती है। इस रास्ते से प्रदेश के विभिन्न जिलों के अलावा प्रांतों से भी पशु ले जाए जाते हैं। इन पशु तस्करों से वसूली के लिए पुल के आसपास नरही थाने के पुलिसकर्मी रहते हैं। जिन तस्करों से सेटिंग नहीं रहती है उनकी गाड़ियों को पकड़कर कोरम किया जाता है। यही नहीं नरही से नारायणपुर के बीच पूरी रात गंगा के किनारे शराब की पेटियों को पहुंचाने का काम चलता रहता है ग्रामीणों में तो यह भी चर्चा है कि नरही थाने के क्षेत्र में हो रही शराब व पशु तस्करी को लेकर एक पुलिस अफसर का भी छत्रछाया है।

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