यूपी में जल निगम ग्रामीण आजमगढ़ के एसई व बलिया के प्रभारी एक्सईएन सस्पेंड
यूपी में जल निगम ग्रामीण आजमगढ़ के एसई व बलिया के प्रभारी एक्सईएन सस्पेंड
चार अन्य जिले के अधिशासी अभियंता पर लगे आरोपों की बैठाई जांच
लापरवाही व अन्य आरोपों में जल निगम के प्रबंध निदेशक ने की कार्रवाई
बलिया। एनडी राय
उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) के प्रबंध निदेशक डॉ राजशेखर ने पांच जिले के अफसरों पर बड़ी कार्रवाई की है। जल निगम (ग्रामीण)आजमगढ़ के अधीक्षण अभियंता और जल निगम (ग्रामीण) बलिया के प्रभारी एक्सईएन मुकीम अहमद को निलंबित कर दिया है। आरोपो की जांच को संयुक्त प्रबन्ध निदेशक (प्रशासन), जल निगम (ग्रामीण) लखनऊ को जांच अधिकारी नामित किया है। इन्हें कार्यालय मुख्य अभियन्ता जल निगम (ग्रामीण) कानपुर से सम्बद्ध किया है। इसके अलावा जल निगम (ग्रामीण) जौनपुर, लखीमपुर खीरी, चंदौली व सहारनपुर के एक्सईएन के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए जांच अधिकारी नामित किया है।
आजमगढ़ के एसई और बलिया जल निगम (ग्रामीण) के प्रभारी एक्सईएन पर आरोप
जल निगम (ग्रामीण), बलिया द्वारा जीरो पावर्टी सर्वेक्षण कम करने, जल सेवा आंकलन कम करने, राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यकम अन्तर्गत स्वीकृत कार्यों को अभी तक पूर्ण न करने, आईजीआरएस के तहत 01.04.2025 से दिनांक 17.02.2026 तक कुल 427 फीड बैंक प्राप्त हुए हैं, उक्त के सापेक्ष असंतुष्ट फीड बैंक 284 (66.50 प्रतिशत) अत्यधिक होने, अपने कर्तव्यों एवं दायित्वों का अनुपालन न करने, अधिकारी कर्मचारी आचरण नियमावली के विरूद्ध कार्य करने, उच्चाधिकारियों द्वारा प्रदत्त विभागीय एवं शासकीय निर्देशों का पालन न करने, विभाग की छवि धूमिल करने तथा उप्र सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली में निहित प्राविधानों का उल्लघंन करने आदि से सम्बन्धित प्रतिकूल तथ्यों के प्रकाश में आने एवं प्रथम दृष्टया दोषी पाये जाने के फलस्वरूप मुकीम अहमद, अधीक्षण अभियन्ता के विरुद्ध उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) 1999 के नियम-7 के अन्तर्गत विभागीय अनुशासनिक जांच संस्थित करते हुए उन्हें निलम्बित किया जाता है तथा आरोपो की जांच हेतु संयुक्त प्रबन्ध निदेशक (प्रशासन), उप्र जल निगम (ग्रामीण) लखनऊ को पदेन जांच अधिकारी नामित किया जाता है। निलम्बन अवधि में इन्हें कार्यालय मुख्य अभियन्ता (का०क्षे०), उ०प्र० जल निगम (ग्रामीण), कानपुर से सम्बद्ध किया जाता है।
अधिशासी अभियंता सहारनपुर के आरोपों की जांच करेंगे मुख्य अभियंता
जल निगम (ग्रामीण) सहारनपुर में अधिशासी अभियन्ता मो. हाशिम द्वारा आईजीआरएस के माध्यम से की गयी शिकायतों का गुणवत्ता पूर्वक निस्तारण न होने के कारण असंतोषजनक फीडबैक का प्रतिशत 73.90 है, जो प्रदेश के निम्न 10 जनपदों में से एक होने, काटी गयी सडकों के पुर्नस्थापन में 100 प्रतिशत पुर्नस्थापना का प्रतिशत मात्र 48, जो प्रदेश औसत से अत्यन्त कम होने, 448 नग ग्राम हर घर जल मार्क के सापेक्ष मात्र 120 ग्राम ही हर घर जल सर्टिफाई कराने तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा भी कार्यशैली को लेकर शिकायत करने, कार्यों के पर्यवेक्षण में गम्भीर शिथिलता व लापरवाही बरतने, उच्चाधिकारियों द्वारा दिये गये निर्देशों का अनुपालन न करने, अधिकारी कर्मचारी आचरण नियमावली के विरूद्ध कार्य करने, शासन के समक्ष विभाग की छवि धूमिल करने तथा उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली मे निहित प्राविधानों का उल्लंघन करने आदि से सम्बन्धित प्रतिकूल तथ्यों के प्रथम दृष्टया प्रकाश में आने एवं दोषी पाये जाने के फलस्वरूप इनके विरूद्ध उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली के अन्तर्गत विभागीय अनुशासनिक जांच संस्थित करते हुए आरोपो की जांच को राकेश कुमार, मुख्य अभियन्ता (आ०क्षे०), उप्र जल निगम (ग्रामीण), आगरा को जांच अधिकारी नामित किया जाता है। जांच अधिकारी प्रकरण की अनुशासनिक जांच कार्यवाही पूर्णकर, जांच आख्या विलम्बतम् 20.03.2026 तक प्रस्तुत करना सुनिश्चित करेगें।
अधिशासी अभियंता चंदौली पर भी कई आरोप
उप्र जल निगम (ग्रामीण), चन्दौली में अधिशासी अभियन्ता (कार्यवाहक) के पद पर कार्यरत अमित राजपूत, सहायक अभियन्ता द्वारा जल सेवा आंकलन, O&M में जाने वाली पेयजल योजनाओं की प्रगति कम होने, RPWSSID बनाये जाने की प्रगति असंतोषजनक होने, आईजीआरएस अंतोषजनक फीडबैक का प्रतिशत अत्यधिक होने एवं माह जनवरी 2026 में योजनाओं का निरीक्षण नही करने, कार्यों में अपेक्षित रूचि न लेने, कार्यो के पर्यवेक्षण में गम्भीर शिथिलता व लापरवाही बरतने, उच्चाधिकारियों द्वारा दिये गये निर्देशों का अनुपालन न करने, अधिकारी कर्मचारी आचरण नियमावली के विरूद्ध कार्य करने, शासन के समक्ष विभाग की छवि धूमिल करने तथा उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली मे निहित प्राविधानों का उल्लंघन करने आदि से सम्बन्धित प्रतिकूल तथ्यों के प्रथम दृष्टया प्रकाश में आने एवं दोषी पाये जाने के फलस्वरूप इनके विरूद्ध उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली के अन्तर्गत विभागीय अनुशासनिक जांच संस्थित करते हुए आरोपो की जांच को विकम प्रताप सिंह, मुख्य अभियन्ता (गो०क्षे०), उ०प्र० जल निगम (ग्रामीण), गोरखपुर को पदेन जांच अधिकारी नामित किया जाता है। जांच अधिकारी प्रकरण की अनुशासनिक जांच कार्यवाही पूर्णकर, जांच आख्या विलम्बतम् 20.03.2026 तक प्रस्तुत करना सुनिश्चित करेगें।
लखीमपुर खीरी एक्सईएन भी जांच के दायरे में
उप्र जल निगम (ग्रामीण), लखीमपुर खीरी में अधिशासी अभियन्ता अविनाश गुप्ता द्वारा jjmup पोर्टल के Table no 20 के अनुसार फर्म मैसर्स एन०सी०सी० को आवंटित 1069 ग्रामों में (667 योजनायें) में से 247 ग्राम (158 योजनायें) हर घर जल सर्टिफाइड कराये गये है, जिसके सापेक्ष 80 नग योजनायें फर्म द्वारा इनिसियेट की गयी एवं अधिशासी अभियंता द्वारा मात्र 34 नग योजनायें ही अप्रूव करने, jjmup पोर्टल के Table no 79 के अनुसार अधिशासी अभियंता, द्वारा विगत 05 माह में निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष कम निरीक्षण करने, आईजीआरएस अन्तर्गत 01.04.2025 से दिनांक 17.02.2026 तक कुल 6407 फीड बैंक प्राप्त हुए हैं, उक्त के सापेक्ष असंतुष्ट फीड बैंक 2442 (38.1 प्रतिशत) होने तथा जेएन-17 के अनुसार 1127 नग परियोजनाओं (डुप्लीकेट एवं जीरो एफएचटीसी को छोडकर) के सापेक्ष मात्र 74 नग अस्थाई आईडी ड्राफ्ट में है एवं कोई भी आईडी को अधिशासी अभियंता द्वारा फाइनलाइज नहीं किया गया। उक्त से स्पष्ट है कि शासकीय कार्यों में रूचि न लेने एवं कार्यों में लापरवाही बरतने के कारण जनपद लखीमपुरखीरी में जल जीवन मिशन की प्रगति प्रभावित करने, विभाग की छवि धूमिल करने तथा उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली मे निहित प्राविधानों का उल्लंघन करने आदि से सम्बन्धित प्रतिकूल तथ्यों के प्रथम दृष्टया प्रकाश में आने एवं दोषी पाये जाने के फलस्वरूप इनके विरूद्ध उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली के अन्तर्गत विभागीय अनुशासनिक जांच संस्थित करते हुए आरोपो की जांच हेतु मुख्य अभियन्ता (मे०क्षे०), उप्र जल निगम (ग्रामीण), मेरठ को जांच अधिकारी नामित किया जाता है। जांच अधिकारी प्रकरण की अनुशासनिक जांच कार्यवाही पूर्णकर जांच आख्या विलम्बतम् दिनांक 20.03.2026 तक प्रस्तुत करना सुनिश्चित करेगें।
एक्सईएन जौनपुर पर लगे आरोपों की होगी जांच
उप्र जल निगम (ग्रामीण) जौनपुर में अधिशासी अभियन्ता सौमित्र श्रीवास्तव द्वारा जल सेवा आंकलन, O&M में जाने वाली पेयजल योजनाओं की प्रगति अत्यधिक कम होने, आईजीआरएस फीडबैक का अंतोषजनक फीडबैक प्रतिशत भी अत्यधिक होने तथा निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष कम निरीक्षण करने, कार्यों में अपेक्षित रूचि न लेने, कार्यों के पर्यवेक्षण में गम्भीर शिथिलता व लापरवाही बरतने, उच्चाधिकारियों द्वारा दिये गये निर्देशों का अनुपालन न करने, अधिकारी कर्मचारी आचरण नियमावली के विरूद्ध कार्य करने, शासन के समक्ष विभाग की छवि धूमिल करने तथा उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली मे निहित प्राविधानों का उल्लंघन करने आदि से सम्बन्धित प्रतिकूल तथ्यों के प्रथम दृष्टया प्रकाश में आने एवं दोषी पाये जाने पर इनके विरुद्ध उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली के अन्तर्गत विभागीय अनुशासनिक जांच संस्थित करते हुए आरोपो की जांच हेतु सुधीर कुमार सिंह, मुख्य अभियन्ता (का०क्षे०), उप्र जल निगम (ग्रामीण), कानपुर को जांच अधिकारी नामित किया जाता है। जांच अधिकारी प्रकरण की अनुशासनिक जांच कार्यवाही पूर्णकर, जांच आख्या विलम्बतम् 20.03.2026 तक प्रस्तुत करना सुनिश्चित करेगें।
