बलिया के ऐतिहासिक बरईया पोखरे में मर रहीं मछलियां, सो रहा मत्स्य विभाग

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बलिया के ऐतिहासिक बरईया पोखरे में मर रहीं मछलियां, सो रहा मत्स्य विभाग

बलिया। चितबडा़गांव नगर पंचायत की ऐतिहासिक बरईया पोखरे की वर्षों पुरानी मछलियों के अचानक मरने से क्षेत्रवासी चिंतित हैं।


बताया जाता है कि नगर पंचायत क्षेत्र के चितबडा़गांव मुहम्दाबाद मार्ग से सटे एक ऐतिहासिक पोखरा है। जिसे नगर के एक धनाढ्य व्यक्ति दीनदयाल बरई द्वारा सैकड़ों वर्ष पहले पोखरे के साथ साथ भगवान शिव का मंदिर भी बनवाया गया है। लगभग 20वर्ष पहले अधिकाधिक संख्या में मछलियों को मरते देख लोगों के अनुरोध पर तत्कालीन राजस्व मंत्री अम्बिका चौधरी ने नलकूप विभाग से एक सरकारी नलकूप लगवाया था। इसके स्वच्छ पानी से मछलियों की जान बची। इधर एक सप्ताह से फिर मछलियों का मरना देख नगर पंचायत चेयरमैन अमरजीत सिंह द्वारा पोखरे में आक्सीजन की कमी की पूर्ति के लिए एडिटर लगवाया गया है। फिर भी मछलियों का मरना जारी है। क्षेत्र के लोगों द्वारा बताया जाता है कि जिस पोखरे में नलकूप से साफ पानी आया करता था उसी रास्ते से इस समय धान के खेतों का अधिक पानी जिसमें रासायनिक उर्वरक व कीटनाशक दवाईयों का अंश होता है, आ रहा है। इसको मछलियां सहन नही कर पाती। दूसरा कारण ये भी है कि इस पोखरे के अधिक पानी का रास्ता बंद हो चुका है। मछलियों का मरने का कारण जो भी हो इस धरोहर को बचाने का प्रयास मत्स्य विभाग द्वारा नहीं किया जा रहा है।

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