बलिया में बाढ़ व कटानरोधी परियोजनाएं हवाहवाई, बाढ़ से हजारों की आबादी प्रभावित

बलिया में बाढ़ व कटानरोधी परियोजनाएं हवाहवाई, बाढ़ से हजारों की आबादी प्रभावित
बलिया। जिले में करोड़ों की बाढ़ व कटानरोधी परियोजनाएं हवाहवाई होकर रह गईं। बाढ़ से हजारों की आबादी प्रभावित हैं। गंगा नदी अब तक के उच्चतम जलस्तर 60.320 मीटर से महज 98 सेमी दूर है जबकि नदी के जलस्तर में बढ़ाव जारी है। वहीं, सरयू और टोंस नदी में भी लगातार बढ़ाव जारी है। तीनों नदियों के जलस्तर में बढ़ोत्तरी से बाढ़ की स्थिति भयावह होती जा रही है। शहर के निचले इलाके के घरों में गंगा की लहरें उफान मार रही है। करीब 25 हजार की आबादी बाढ़ से प्रभावित है। हालांकि प्रशासन बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद में जुटा है।

बाढ़ निमंत्रण कक्ष के अनुसार बुधवार को गायघाट गेज पर गंगा का जलस्तर सुबह 8 बजे 59.410 मीटर रिकार्ड किया गया, जबकि यहां का उच्चतम जलस्तर वर्ष 2016 का 60.390 मीटर है। वहीं, बिहार के बक्सर गेज पर गंगा नदी उच्चतम जलस्तर 60.320 मीटर से 11 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। जलस्तर में लगातार बढ़ाव से तटवर्ती क्षेत्र के लोगों में बाढ़ की आशंका से दहशत है। बलिया शहर के निचले इलाके के दर्जनों घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है। इच्छाचौबे के पर से लेकर जयप्रकाशनगर के भवन टोला तक के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी फैलता जा रहा है। कई स्कूल कालेज बाढ़ की जद में आ चुके हैं। उधर, सरयू नदी का जलस्तर डीएसपी हेड पर बुधवार की सुबह आठ बजे 64.17 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरा विन्दु 64.01 मीटर से ऊपर है। माझी गेज पर 55.90 मीटर रिकार्ड किया गया, जबकि यहां लाल निशान 55.150 मीटर है। चांदपुर गेज पर नदी का जलस्तर 58.56 मीटर रिकार्ड हुआ, जबकि खतरा विन्दु 58 मीटर है। इसी तरह पिपराघाट गेज पर टोंस नदी का जलस्तर सुबह आठ बजे 60.80 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरा निशान 60 मीटर से 80 सेंटीमीटर ऊपर है।
