बलिया बलिदान दिवस पर खुला जेल का फाटक, निकाली तिरंगा यात्रा

बलिया बलिदान दिवस पर खुला जेल का फाटक, निकाली तिरंगा यात्राबलिया। बलिया बलिदान दिवस पर बुधवार को सुबह नौ बजे ऐतिहासिक जिला जेल का फाटक प्रतीकात्मक रूप से खोला गया। इस दौरान परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय सहित प्रतीकात्मक सेनानियों का जत्था जेल से बाहर निकला। जेल परिसर भारत माता की जय, वंदेमातरम और “जेल का फाटक टूटेगा, चित्तू पाण्डेय छूटेगा” जैसे नारों से गूंज उठा।जेल परिसर स्थित राजकुमार बाघ की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन करने के बाद सेनानियों का जत्था कुंवर सिंह चौराहा पहुंचा। यहां वीरवर बाबू कुंवर सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। इसके बाद टीडी कॉलेज परिसर स्थित सेनानी मुरली बाबू व चौराहा पर पंडित रामदहिन ओझा की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई।इस दौरान विभिन्न महापुरुषों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर उनके योगदान को याद किया गया। बलिया बलिदान दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम जिले के उन वीर सेनानियों की याद को जीवंत करता नजर आया, जिन्होंने वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान अंग्रेजी शासन के खिलाफ निर्णायक संघर्ष किया था। तिरंगा यात्रा में जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह, पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह, सेनानी आश्रितों, जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों सहित बड़ी संख्या में नागरिक शामिल रहे।बता दें कि कि 19 अगस्त 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान चित्तू पांडेय के नेतृत्व में बलिया की जनता ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ निर्णायक संघर्ष किया था। हजारों लोगों ने जिला कारागार पर धावा बोलकर सेनानियों को मुक्त कराया और बलिया में समानांतर सरकार की स्थापना की थी। गुदरी बाजार समेत शहर के विभिन्न स्थानों पर हुए संघर्ष में कई क्रांतिकारियों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। हर वर्ष 19 अगस्त को बलिया बलिदान दिवस पर इन वीर सपूतों के साहस, संघर्ष और बलिदान को याद किया जाता है।
